Vivek Mishra's Blog

26 january

और मुझे लगा की हम 26 जन्वरी को आज़ाद हुए थे!
सपना तोड़ दिया आपने..चलो तिलिस्म था.टूटना भी ज़रूरी था
सच है तारीखें कहाँ लोगों को आज़ाद करती है
बेड़ियाँ अपनी बनाई हुई हैं..खुद ही खोलनी होगी

Right place, right time

Shopping is fun always. It’s the best way to overcome a bad day or a bad breakup. Shopping urge is compelling to an extent that online fashion industry is worth billions in India. Sites drenching its customers with offers and deals every now and then.

I have been a compulsive buyer always, with too much options available we (I) tend to buy extra, things cluttering the wardrobe, without being used frequently or ever.

Knowing your self is an important for a good buy. Need, Occasion, fit, trends and above all your body type. Playing safe (usual) might be the safest option yet experimenting and exploring would unveil the diva in you and definitely boost your ‘E’(X) factor.

I am trying to list few websites that will help you in getting yourself a nice treat in terms of great collection, trending style, great deals and quick delivery. There are few sites that help…

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एक शहर देखना था, एक शहर देख रहा हूँ मैं,

एक गाँव छोड़ना था, एक गाँव ढूँढ रहा हूँ मैं.

उँची उँची इमारतो में गूँजती चीखे,

उन चीखों को सुनने वाली आवाज़ देख रहा हूँ मैं,

एक शहर देखना था……..

आस्मान को छूने वाली दीवारों में एक खिडकी ढूँढ रहा हूँ मैं,

एक गाँव छोड़ना था…..

जॉय साथ है

साइकल एक है, पर बैठे हम चार हैं,

जॉय राइड है या नही पर जॉय साथ है.

धूप कड़क है या खिली खिली,

इससे कोई सरोकार नही, पर जॉय साथ है.


वो दूर कोई मंज़िल है, या क्षितिज,

बस पींगे मारते जा रहें हैं, सफ़र का मज़ा लिए जा रहे हैं.

जॉय राइड तो नही है शायद, पर जॉय साथ है!


आज एसी कार है, रफ़्तार है,

आँखों पे चस्मा है, बैठे बैठे गानो का आनंद लिए जा रहे है,

जॉय राइड तो है, पर… जॉय नही साथ है.



बचपन में पर्वत को देखकर मैं आवाज़ लगाता
था की मैं वहाँ ज़रूर पहुँचुगा. सब कहते थे की ये करेगा. आज उँचाई पर तो हूँ और आवाज़ भी लगाता हूँ, आवाज़ तो वापस सुनाई देती है पर वो लोग नही आते!

यह भर्म है या वो भ्रम था. ढूंड रहा हूँ



बंद कर दो ये दरवाजे या .. ये खिड़कियाँ खुली रहने दो.

शायद हवा रुक रुक के आए . झोंके तो ठीक  हैं ….पर ये बवंडर!….ये बवंडर बहा ले जाता है. देखो कुण्डी मजबूती से लगाना पता नही कब सब्र की तरह टूट जाए.

बंद दरवाज़े हमेशा किसी आहट को सुनना चाहते हैं ..पर… बंद ही रहने दो…  झोंके ही ठीक हैं​


Requesting Honorable Member of Parliament give up canteen food subsidy

A mutton curry for Rs 20, chicken curry for Rs 29, boiled rice Rs 4, so is boiled egg, masala dosa for Rs 6, vada for Rs 2, puri with veg for Rs 2, non-veg meal for Rs 33, and a three course lunch for Rs 61, veg/egg/chicken sandwiches at just Rs 3/4/6, burger for Rs 17, pizza for Rs 20, low fat cream with fruits for Rs 19, custard with fruits (low fat milk) for Rs 23, roomali rotti, chapatti or pappad at just Re 1. And from the Winter Session 2014, Hyderabadi biriyanis for Rs 50 and 20 among other things to the menu.

This 95-item menu is not from a Socialist-run Restaurant at the end of the Universe, but from the four canteens at the Parliament in Delhi, where many legislators are increasingly pushing for subsidy cuts in food, fuel and fertilisers among other things

I request to all honorable MP’s. Please GIVE IT UP.  

Please comment if you agree/disagree.


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