शहर

by Vivek Mishra


एक शहर देखना था, एक शहर देख रहा हूँ मैं,

एक गाँव छोड़ना था, एक गाँव ढूँढ रहा हूँ मैं.

उँची उँची इमारतो में गूँजती चीखे,

उन चीखों को सुनने वाली आवाज़ देख रहा हूँ मैं,

एक शहर देखना था……..

आस्मान को छूने वाली दीवारों में एक खिडकी ढूँढ रहा हूँ मैं,

एक गाँव छोड़ना था…..