26 january

by Vivek Mishra


और मुझे लगा की हम 26 जन्वरी को आज़ाद हुए थे!
सपना तोड़ दिया आपने..चलो तिलिस्म था.टूटना भी ज़रूरी था
सच है तारीखें कहाँ लोगों को आज़ाद करती है
बेड़ियाँ अपनी बनाई हुई हैं..खुद ही खोलनी होगी